सर्वसमावेशी संस्कृति का प्रतीक महाकुंभ
यदि आप भारत के गांव-कस्बों से गुजरें तो ऐसे असंख्य लोग मिल जाएंगे. जोप्रातः स्नान करते समय ‘गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती । नर्मदे सिंधु कावेरी जलेऽस्मिन् संनिधि कुरु॥‘ का मंत्रोच्चार कर रहे होंगे। इस मंत्र का अर्थ है – हे यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु, और कावेरी हमारे जल में उपस्थितहोकर इसे पवित्र करो। स्नान के नित्यकर्म में राष्ट्र की सभी पवित्र नदियों का आह्वान यह बताता है […]
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