चारधाम यात्रा दुनिया की सबसे पवित्र तीर्थ यात्राओं में से एक

Uttarakhand

देहरादून। चार धाम यात्रा दुनिया की सबसे पवित्र तीर्थ यात्राओं में से एक है। इस यात्रा में शामिल चार मंदिर यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ हैं। चार धाम यात्रा के सभी पवित्र स्थल अलग-अलग देवी देवताओं को समर्पित हैं। केदारनाथ धाम 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं और यह भगवान शिव को समर्पित है। बदरीनाथ धाम भगवान बद्री या विष्णु को समर्पित है। गंगोत्री धाम माता गंगा और यमुनोत्री माता यमुना को समर्पित हैं।
चारधाम यात्रा का हिन्दू धर्म में बहुत अधिक धार्मिक महत्व है। यह माना जाता रहा है कि प्रत्येक हिंदू को अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार इस तीर्थ यात्रा पर जाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि चारधाम यात्रा जीवन भर के पापों को धो कर मोक्ष के द्वार खोलती है। कहा जाता है कि जब कोई तीर्थयात्री चारधाम यात्रा समाप्त करता है, तो वह मन की पूर्ण शांति प्राप्त करता है। यहाँ हर साल लाखों की संख्या में देश-दुनिया से श्रद्धालु आते हैं। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा शुरु हो चुकी है। चारों धामों गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ व बदरीनाथ के कपाट खुल चुके हैं। देशभर से बड़ी संख्या में तीर्थयात्री चार धामों के दर्शन को पहुंच रहे हैं। लोगों में चारधाम यात्रा को लेकर खासा उत्साह बना हुआ है। 20 लाख से अधिक लोग चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण करा चुके हैं और यह सिलसिला लगातार जारी है।
उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट 22 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन खुल चुके हैं। रूद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट 25 अप्रैल को खुल चुके हैं और चमोली जिले में स्थित बदरीनाथ धाम के कपाट 27 अप्रैल को आम श्रद्धालुओं के लिए खुल चुके हैं। तीर्थयात्री बड़ी संख्या में यात्रा पर पहुंच रहे हैं। बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही भू-बैकुण्ठ धाम के आसपास तप्तकुण्ड, नारद कुण्ड, शेष नेत्र झील, नीलकण्ठ शिखर, उर्वशी मन्दिर, ब्रह्म कपाल, माता मूर्ति मन्दिर तथा देश के प्रथम गांव माणा, भीमपुल, वसुधारा जल प्रपात एवं अन्य ऐतिहासिक व दार्शनिक स्थलों पर भी श्रद्वालुओं एवं पर्यटकों की भीड जुटने लगी है। इस बार शुरूआत में ही रिकार्ड पंजीकरण के साथ बडी संख्या में श्रद्वालु बदरीनाथ पहुॅच रहे हैं।
18 फरवरी से प्रारम्भ हुये चारधाम एवं हेमकुण्ड यात्रियों के पंजीकरण के तहत अभी तक 20,05840 से अधिक यात्री अपना पंजीकरण करवा चुके हैं। विभिन्न धामों में यात्रियों के पंजीकरण की यदि हम बात करें तो केदारनाथ के लिए 7,05,892, बद्रीनाथ के लिए 59,7093, गंगोत्री के लिए 3,65,107 और यमुनोत्री धाम के लिए 3,20,930 एवं हेमकुण्ड के लिए 16,618 से अधिक यात्री अपना पंजीकरण करवा चुके हैं। हेमकुंड साहिब के कपाट 20 मई को खुलेंगे। बद्री विशाल के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम में 40 हजार से भी अधिक यात्री दर्शनों का लाभ उठा चुके हैं। जीएमवीएन गेस्ट हॉउसों की बुकिंग के तहत अभी तक 10,91,11,996 (दस करोड़ करोड़ इक्यानवे लाख ग्यारह हजार नौ सौ छियानवे) रुपये से अधिक की बुकिंग भी की जा चुकी है। राज्य का स्वास्थ्य विभाग चारधाम यात्रा को लेकर पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रहा है। चारधाम यात्रियों की सुविधा को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पहली बार 9 भाषाओं में यात्रा की नई एसओपी जारी की है। मातृ भाषा हिन्दी के साथ ही तमिल, उडिया, कन्नड, मराठी, बंगाली, पंजाबी, गुजराती और अंग्रेजी में यह एसओपी जारी की गई है।
यमुना नदी का स्रोत, यमुनोत्री उत्तरकाशी जिले में समुद्र तल से 3293 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यमुनोत्री मंदिर हिमालय के ग्लेशियरों और थर्मल स्प्रिंग्स से घिरा हुआ है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार यमुना, मृत्यु के देवता यम की बहन हैं। ऐसा माना जाता है कि यमुना में स्नान करने से शान्ति मिलती है।
गंगोत्री मंदिर देवी गंगा को समर्पित है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, गंगोत्री धाम वह स्थान है जहां गंगा नदी स्वर्ग से उतरी थी जब भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं से छोड़ा था। समुद्र तल से 3042 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, गंगोत्री उत्तरकाशी जिले में स्थित है।
केदारनाथ धाम हिमालय की गोद में स्थित रुद्रप्रयाग जिले में समुद्र ताल से 3553 मीटर की ऊंचाई पे स्थित है। केदारनाथ धाम भगवान शिव को समर्पित है। यह न केवल चारधाम यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थों में से एक है, बल्कि इस प्राचीन मंदिर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक भी माना जाता है। इसके अलावा, केदारनाथ, कल्पेश्वर, तुंगनाथ, मदमहेश्वर और रुद्रनाथ मंदिर एक साथ पंच केदार बनाते हैं।
बदरीनाथ धाम नर और नारायण पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित है। बद्रीनाथ धाम समुद्र ताल से 3300 मीटर की ऊंचाई पे स्थित है। यह चमोली जिले में स्थित है। बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु को समर्पित है, जिन्हें दिव्य हिंदू त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु और शिव) का रक्षक और संरक्षक माना जाता है। इन महत्वपूर्ण कारणों के अलावा, बद्रीनाथ धाम को चारधाम यात्रा में इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह वह स्थान है जहाँ आदि शंकराचार्य ने मोक्ष प्राप्त किया था, इस प्रकार, पुनर्जन्म की प्रक्रिया से अपनी स्वतंत्रता प्राप्त करते हैं।

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